रिसाली। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच रिसाली की सियासत में महापौर पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस ने भले ही सीधे तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया, लेकिन इशारों-इशारों में संभावित महापौर प्रत्याशी की ओर संकेत जरूर कर दिया। इस राजनीतिक संकेत के बाद कांग्रेस के कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू और क्षेत्र की पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश नजर आई कि रिसाली नगर निगम चुनाव में भूपेश बघेल की पसंद और रणनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। टिकट के दावेदार भी अभी से नेताओं के चक्कर लगाने में जुट गए हैं।
ताम्रध्वज साहू को रिसाली नगर निगम के गठन और संगठन को खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला नेता माना जाता है। पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 21 पार्षद जीतकर आए थे और जोड़-तोड़ के बाद कांग्रेस महापौर बनाने में सफल हुई थी। इस बार पार्टी पिछली स्थिति को दोहराने के बजाय पहले से रणनीति तैयार करती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि इसी महीने भूपेश बघेल का रिसाली नगर निगम क्षेत्र में दो बार दौरा भी राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है।
*भाजपा में स्थानीय चेहरे की तलाश*
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी में भी महापौर पद को लेकर मंथन तेज हो गया है। पार्टी के स्थानीय समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच स्थानीय महिला उम्मीदवार को मौका देने की मांग जोर पकड़ रही है। आरक्षण अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए होने के कारण दावेदारों की तस्वीर भी काफी हद तक स्पष्ट होने लगी है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्थानीय महिला चेहरों की तलाश तेज कर दी है और कई संभावित नामों पर चर्चा होने की खबर है। वहीं बाहर से आने वाले संभावित प्रत्याशियों को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में असमंजस और नाराजगी की आशंका भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा शीर्ष नेतृत्व के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की पसंद को प्राथमिकता दी जाए या किसी मजबूत बाहरी चेहरे को मैदान में उतारा जाए। पार्टी के लिए रिसाली की सीट महत्वपूर्ण है, इसलिए स्थानीय संगठन और समर्थकों को साधकर चलना भी जरूरी माना जा रहा है।
वार्ड आरक्षण के बाद तस्वीर होगी साफ
महापौर पद के साथ-साथ पार्षद पद के दावेदारों ने भी अपनी-अपनी राजनीतिक दौड़ शुरू कर दी है। वार्डवार आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद दोनों प्रमुख दलों में दावेदारों की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
फिलहाल रिसाली में मुकाबला केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं, बल्कि स्थानीय चेहरा बनाम बाहरी चेहरा और संगठन की पसंद बनाम कार्यकर्ताओं की पसंद के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब सवाल यही है—कांग्रेस में भूपेश बघेल के इशारे वाला चेहरा बाजी मारेगा या भाजपा स्थानीय महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारकर कांग्रेस को चुनौती देगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में टिकट वितरण के साथ सामने आएगा।







