विशेष रिपोर्ट | दुर्ग रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले नमक, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा और गरम मसाले की कीमतों में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2014 की तुलना में 2026 में अधिकांश मसालों के दाम 80 से 120 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसका सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार वृद्धि, उत्पादन लागत बढ़ना, परिवहन खर्च में इजाफा, मौसम की मार और मसालों की मांग बढ़ने जैसे कारणों से बाजार में मसाले लगातार महंगे हुए हैं। किराना व्यापारियों का कहना है कि पहले जहां एक परिवार सीमित बजट में महीने भर का राशन खरीद लेता था, वहीं अब केवल मसालों पर ही पहले की तुलना में कहीं अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।
*सबसे ज्यादा असर किस पर?*
– हर महीने राशन खरीदने वाले परिवारों का खर्च बढ़ा।
– छोटे होटल, ढाबे और भोजनालयों की लागत में वृद्धि हुई।
– मसालों की महंगाई का असर तैयार भोजन की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा।
– घरेलू बजट में मसालों का हिस्सा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।
*एक नजर में*
– 12 साल में अधिकांश मसाले 80% से 120% तक महंगे।
– जीरा में सबसे अधिक बढ़ोतरी।
– नमक जैसी आवश्यक वस्तु भी लगभग दोगुनी कीमत पर पहुंची।
– महंगाई का सीधा असर आम परिवार की रसोई और मासिक खर्च पर।
*महंगाई का असर: आय की रफ्तार से आगे निकली कीमतें*
पिछले 12 वर्षों में आवश्यक खाद्य सामग्री, मसालों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं बड़ी संख्या में मध्यम वर्ग के लोगों की आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप परिवारों के मासिक बजट पर दबाव लगातार बढ़ा है और बचत करना पहले की तुलना में अधिक कठिन होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संगठित क्षेत्र और निर्माण क्षेत्र में कार्यरत कई मजदूरों की मजदूरी में समय के साथ वृद्धि हुई है, लेकिन बढ़ी हुई श्रम लागत का एक हिस्सा मकानों, निर्माण सामग्री और विभिन्न सेवाओं की कीमतों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक भी पहुंचा है। इसका प्रभाव विशेष रूप से उन मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ा है जो अपना घर बनाने या खरीदने का सपना देख रहे हैं।
किराना, सब्जी, मसाले, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, परिवहन और मकान निर्माण जैसी लगभग हर प्रमुख जरूरत पर खर्च बढ़ने से आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है। कई परिवार अब अपनी आय का बड़ा हिस्सा केवल आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में खर्च कर रहे हैं।








