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28 साल पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती मामले में बड़ा एक्शन, 22 आरोपियों के खिलाफ 1000 पन्नों की चार्जशीट

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया में करीब 28 साल पहले हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में 22 आरोपियों के खिलाफ लगभग 1000 पन्नों का आरोपपत्र विशेष न्यायालय में पेश किया है। आरोपियों में छह तत्कालीन लोकसेवक और भर्ती में चयनित 16 अभ्यर्थी शामिल हैं।

यह मामला वर्ष 1998 में 320 शिक्षाकर्मी पदों पर हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन को लेकर 25 दिसंबर 1998 को शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद वर्ष 2000 में प्राथमिकी दर्ज हुई और लंबे समय तक जांच चली। जांच एजेंसी ने 26 अक्टूबर 2026 को कवर्धा स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया।

320 पदों पर भर्ती, चयन प्रक्रिया पर उठे थे सवाल

पंडरिया जनपद पंचायत में वर्ष 1998 के दौरान शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 320 पदों को भरने के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की गई थी। तत्कालीन जनपद पंचायत अध्यक्ष अर्जुन तिवारी ने भर्ती में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी।

शिकायत में मेरिट सूची तैयार करने, साक्षात्कार में दिए गए अंकों, अध्यापन अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक देने और आरक्षण के नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए थे। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर जांच शुरू हुई, जिसमें भर्ती से संबंधित दस्तावेजों और चयन प्रक्रिया की पड़ताल की गई।

करीब 26 साल की जांच के बाद दाखिल हुआ आरोपपत्र

जांच एजेंसियों ने भर्ती के अभिलेख, उम्मीदवारों की मेरिट सूची, अनुभव प्रमाणपत्र, साक्षात्कार प्रक्रिया और चयन समिति की भूमिका की जांच की। इस दौरान दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य जुटाए गए।

एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर छह तत्कालीन लोकसेवकों और 16 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार मिला। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होने का अर्थ आरोपियों का दोषी साबित होना नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि और अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

चयन समिति के सदस्यों के रिश्तेदारों को लाभ देने का आरोप

जांच के दौरान चयन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और सदस्यों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही। एजेंसी के मुताबिक, समिति से जुड़े कुछ सदस्यों के रिश्तेदार भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे।

आरोप है कि कुछ सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों के साक्षात्कार में भाग लिया और उन्हें अंक भी दिए। जांच एजेंसी ने इसे हितों के टकराव और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है।

इस संदर्भ में उग्रसेन चंद्रवंशी, नीरा चंद्रवंशी, विनीता वैष्णव, देवेश वैष्णव, स्वर्णा वैष्णव, कौशल्या वैष्णव और शैल तिवारी के नाम जांच में सामने आए। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।

आरोपपत्र में शामिल छह तत्कालीन लोकसेवक

विशेष न्यायालय में प्रस्तुत आरोपपत्र में छह तत्कालीन लोकसेवकों के नाम शामिल हैं:

  1. एम.एल. भारती — तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी
  2. अंबिका प्रसाद शांडिल्य — तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी
  3. एन.एल. वस्त्रकार — तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी
  4. एन.आर. वर्मा — तत्कालीन उप संचालक, लोक शिक्षण
  5. शंकरलाल चंद्रवंशी — तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति अध्यक्ष
  6. हरिराम घृतलहरे — तत्कालीन समिति सदस्य

इनके अलावा भर्ती प्रक्रिया में चयनित 16 अभ्यर्थियों को भी आरोपपत्र में शामिल किया गया है।

जांच के दौरान तीन आरोपियों की मौत

लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण की जांच के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। इनमें तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. बढ़ई तथा शिक्षा स्थायी समिति के सदस्य बृज बिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा के नाम बताए गए हैं। आरोपपत्र में इनकी मृत्यु का उल्लेख भी किया गया है।

मेरिट सूची और अनुभव प्रमाणपत्रों में कथित गड़बड़ी

जांच एजेंसी के अनुसार, भर्ती के दौरान उम्मीदवारों की मेरिट सूची तैयार करने और साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों को बुलाने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने के आरोप हैं। चयन प्रक्रिया में मध्य प्रदेश पंचायत शिक्षाकर्मी भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम, 1997 लागू थे।

आरोप है कि अध्यापन अनुभव के नाम पर अतिरिक्त अंक जोड़ने से उम्मीदवारों की योग्यता सूची प्रभावित हुई। जांच में कुछ अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाए गए। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे उम्मीदवारों को अनुभव का लाभ दिए जाने का आरोप है, जो संबंधित अवधि में नियमित रूप से महाविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे थे।

जांच एजेंसी ने आशंका जताई कि इन अनियमितताओं के चलते अन्य पात्र अभ्यर्थियों के चयन की संभावनाएं प्रभावित हुई होंगी।

महिला आरक्षण के तहत चयन प्रक्रिया भी जांच के घेरे में

भर्ती में सामान्य महिला वर्ग के 49 पदों के लिए 160 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने का विवरण भी जांच में सामने आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें सामान्य वर्ग की 130, अन्य पिछड़ा वर्ग की 26, अनुसूचित जाति की तीन और अनुसूचित जनजाति की एक अभ्यर्थी शामिल थीं।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि अंतिम चयन के दौरान क्षैतिज आरक्षण और विभिन्न वर्गों के समायोजन से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। इन बिंदुओं को भी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच का हिस्सा बनाया गया।

दिव्यांग वर्ग के पदों पर भी उठे सवाल

अनुसूचित जाति के दिव्यांग वर्ग के चार पदों के लिए 15 आवेदकों में से केवल 10 को साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने का मामला भी जांच के दायरे में रहा। जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चुनने में किन नियमों और मानकों का पालन किया गया था।

भर्ती से संबंधित दस्तावेजों और चयन सूची में सामने आई कथित विसंगतियों को आरोपपत्र में शामिल किया गया है।

भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराएं

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों की कथित भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत आरोपपत्र पेश किया गया है।

इन धाराओं में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और दस्तावेजों में कथित जालसाजी जैसे आरोप शामिल हैं। अब न्यायालय में आरोपपत्र और साक्ष्यों की जांच के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।

अब अदालत में तय होगी आरोपों की दिशा

पंडरिया की शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़ा यह मामला शिकायत के करीब 28 साल बाद महत्वपूर्ण न्यायिक चरण में पहुंचा है। जांच में मेरिट सूची, साक्षात्कार के अंक, अनुभव प्रमाणपत्र और आरक्षण व्यवस्था से संबंधित कई आरोप सामने आए हैं।

फिलहाल, ये आरोप जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए हैं। आरोपियों की जिम्मेदारी और मामले के अंतिम निष्कर्ष का निर्धारण न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों तथा सुनवाई के आधार पर होगा।

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Author: Dhaara News

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