पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित कई दिग्गजों को आमंत्रण, लेकिन स्थानीय भाजपा विधायक आमंत्रण सूची से बाहर! आखिर कुथरेल और चंदखुरी में क्या चल रहा है?
दुर्ग। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा की राजनीति में कुथरेल के दशहरा उत्सव के आमंत्रण पत्र ने नई बहस छेड़ दी है। क्षेत्र में सबसे बड़े दशहरा आयोजनों में गिने जाने वाले कुथरेल के कार्यक्रम में स्थानीय विधायक को आमंत्रित नहीं किए जाने की पुष्टि होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल अब सिर्फ आमंत्रण पत्र में नाम नहीं होने का नहीं, बल्कि **विधायक को बुलाया ही क्यों नहीं गया?** इसका है।
दशहरा जैसे बड़े धार्मिक और सामाजिक आयोजन में क्षेत्र के मौजूदा विधायक की मौजूदगी सामान्य तौर पर महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन कुथरेल के आमंत्रण पत्र में पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित कई प्रमुख नेताओं और जनप्रतिनिधियों को जगह मिली, जबकि स्थानीय विधायक को आमंत्रित नहीं किया गया। यह घटनाक्रम दुर्ग ग्रामीण के राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े करता है।
भारी जीत के बाद भी विधायक से दूरी क्यों?
चुनाव में बड़ी जीत हासिल करना एक बात है, लेकिन अपने ही क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों में स्वीकार्यता बनाए रखना दूसरी। कुथरेल के दशहरा उत्सव में विधायक को आमंत्रित नहीं किए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या क्षेत्र में उनके प्रति नाराजगी है या आयोजन समिति के अपने अलग राजनीतिक-सामाजिक समीकरण हैं?
खास बात यह है कि मामला केवल आमंत्रण पत्र में नाम छूटने का नहीं है। विधायक को बुलाया ही नहीं गया, ऐसे में इसे साधारण मुद्रण संबंधी चूक बताकर खारिज करना उचित नहीं होगा। हालांकि, इसके पीछे का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

कुथरेल से चंदखुरी तक सियासी चर्चा
दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में कुथरेल और चंदखुरी जैसे स्थानों के राजनीतिक घटनाक्रम पर स्थानीय स्तर पर नजर रखी जा रही है। दशहरा उत्सव के मंच पर किन नेताओं को महत्व दिया गया और किसे दूर रखा गया, यह अब चर्चा का विषय बन गया है।
आयोजन में पूर्व जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित किए जाने के बीच वर्तमान विधायक को नहीं बुलाना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दूरी का संकेत है? क्या विधायक और आयोजन से जुड़े लोगों के बीच कोई असहमति है? या इसके पीछे कोई दूसरा कारण है? इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है।
भाजपा के लिए भी सवाल, विरोध की चर्चा को कितना आधार?
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधायक भाजपा से हैं और आयोजन में आमंत्रित अतिथियों की सूची राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में है। यदि स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार की नाराजगी है, तो पार्टी के लिए यह संकेत हो सकता है कि क्षेत्रीय संबंधों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद पर ध्यान देने की जरूरत है।
हालांकि, एक आयोजन के आधार पर पूरे क्षेत्र में विधायक के विरोध या भाजपा के भीतर गुटबाजी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन विधायक को आमंत्रित नहीं किए जाने का तथ्य राजनीतिक चर्चा को जरूर बल देता है।
सबसे बड़ा सवाल: विधायक को न्योता क्यों नहीं?
कुथरेल के दशहरा उत्सव ने दुर्ग ग्रामीण की राजनीति में एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—**क्या यह महज आयोजन समिति का फैसला है या स्थानीय राजनीति में बढ़ती दूरी का संकेत?**
अब सबकी नजर आयोजन समिति की प्रतिक्रिया और विधायक के रुख पर रहेगी। यदि इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण है, तो आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल इतना तय है कि कुथरेल के दशहरा उत्सव में विधायक को आमंत्रित नहीं किया जाना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।








