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दुर्ग समेत पूरे छत्तीसगढ़ में चावल के दामों में इजाफा, रसोई का बजट बिगड़ा: आम जनता पर महंगाई का डबल डोज

 

दुर्ग। छत्तीसगढ़ में आम लोगों की रसोई का बजट लगातार बिगड़ता जा रहा है। पहले रसोई गैस, बिजली और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने परिवारों की जेब पर असर डाला, वहीं अब चावल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। दुर्ग जिले सहित प्रदेश के कई हिस्सों में चावल के दामों में एक साथ उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।

स्थानीय बाजारों में जो सामान्य चावल पहले ₹40 प्रति किलो मिलता था, वह अब ₹50 प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह ₹50 प्रति किलो बिकने वाला चावल अब ₹65 प्रति किलो तक पहुंच चुका है, जबकि ₹60 प्रति किलो वाला प्रीमियम चावल अब ₹75 प्रति किलो में बिक रहा है।

कीमतों में कितनी बढ़ोतरी?

– ₹40 से ₹50 प्रति किलो — 25% वृद्धि

– ₹50 से ₹65 प्रति किलो — 30% वृद्धि

– ₹60 से ₹75 प्रति किलो — 25% वृद्धि

यानी विभिन्न श्रेणियों में चावल की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

आम उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले से ही बढ़ती महंगाई ने घरेलू बजट पर भारी दबाव बना रखा है। ऐसे में चावल जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तु के दाम बढ़ने से सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और उन परिवारों पर पड़ रहा है जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में नहीं आते।

बाजार में यह चर्चा भी है कि प्रदेश में मिलिंग और थोक स्तर पर कीमतें बढ़ने का असर खुदरा बाजार तक पहुंचा है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे वास्तविक कारणों और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो आने वाले समय में रसोई का खर्च और बढ़ सकता है। आम लोगों का कहना है कि एक ओर गैस सिलेंडर, बिजली बिल और अन्य घरेलू खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं अब चावल की महंगाई ने भी परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार चावल और अन्य खाद्यान्नों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी, या फिर आम जनता को महंगाई का यह बोझ इसी तरह उठाना पड़ेगा?

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Author: Dhaara News

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