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SIR ने सबको ‘फर्जी’ बना दिया! ममता दीदी SC में, छत्तीसगढ़ वाले घर में: SIR ने कराया ‘घुसपैठिया फील’—कौन बचा रहा है डेमोक्रेसी? पढ़े ये खबर

छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का तमाशा अब और भी बड़ा हो गया है! राज्य में कुल 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार से ज्यादा मतदाताओं की सूची थी, लेकिन ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होते ही 27 लाख से अधिक नाम (करीब 13%) गायब हो गए।

इनमें शामिल हैं:
6 लाख 42 हजार से ज्यादा मृत घोषित (कई जगह तो जिंदा लोग भी “मरा हुआ” लिखकर चले गए! क्या पता, SIR ने उन्हें अमर होने का मौका दिया हो?)
19 लाख से ज्यादा शिफ्टेड या लंबे समय से अनुपस्थित (अरे भाई, क्या सब एक साथ दूसरे राज्य में पिकनिक पर चले गए?)
बाकी 1.79 लाख डुप्लिकेट एंट्री या अन्य कारण (एक नाम दो जगह? क्या क्लोनिंग का नया दौर शुरू हो गया?)

अब फरवरी 2026 तक लॉजिकल एरर वाले 65 लाख मतदाताओं के नाम अटके पड़े हैं—अगर 10-14 फरवरी तक आपत्ति नहीं उठी तो ये भी कट जाएंगे।

गांव-शहर में लोग पुराने राशन कार्ड, आधार, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल सर्टिफिकेट खंगाल रहे हैं। BLO के घर-घर चक्कर लगा रहे हैं, नोटिस देखकर घबराहट में “हम तो यहीं पैदा हुए, यहीं मरेंगे—ये घुसपैठिया लेबल किसने लगा दिया?”
लेकिन असली मजा तो सरकारी महकमे में है! ऊपर के बड़े अधिकारी नीचे वालों को टार्गेट दे-देकर थका रहे हैं—”जितने नाम काटोगे, उतना प्रमोशन!” BLO और ERO दिन-रात दौड़ रहे हैं, लेकिन सरकारी काम पूरी तरह अटक गए हैं। फाइलें धूल खा रही हैं, विकास योजनाएं रुक गईं, क्योंकि सब SIR की चक्कर में फंसे हैं। बड़े अफसरों की तो मौज हो गई है—वे ऑफिस में बैठकर चाय पीते हैं, नीचे वाले भाग-दौड़ करते हैं। “अरे, हम तो सिर्फ निर्देश दे रहे हैं, तुम करो काम!”
और हद तो ये कि कई जनप्रतिनिधियों ( जैसे पंच, सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, नगर पंचायत, पालिका, निगम अध्यक्ष MLA, MP) और अधिकारियों को खुद SIR का नोटिस मिला है! उन्हें साबित करना पड़ रहा है कि वे असली भारतीय हैं, वोटर हैं। जैसे पूर्व IPS और TMC MLA हुमायुन कबीर को बंगाल में नोटिस मिला, जहां उन्होंने कहा—”मैं UN डेपुटेशन पर था, इसलिए नाम नहीं मिला?” छत्तीसगढ़ में भी कई विधायकों को दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं। अब ऐसा लग रहा है कि सरकार खुद पढ़ी-लिखी नहीं है—या तो जनता किसी को समझ नहीं आ रही! क्या ECI को लगता है कि MLA लोग भी घुसपैठिए हैं? या ये “लॉजिकल एरर” का नया लेवल है, जहां नेता भी “डुप्लिकेट” हो गए?
सोशल मीडिया पर तो मजा ही आ गया है। जो लोग कल तक बिहार SIR के समय “घुसपैठियों को बाहर करो, रोहिंग्या-बांग्लादेशी वोटर हटाओ” चिल्ला रहे थे, आज खुद के नाम कटते देख रहे हैं। कमेंट बॉक्स में लिखा जा रहा है:
“दिदी ममता, अब छत्तीसगढ़ वाले भी घुसपैठिए फील कर रहे हैं!

“SIR = Silent Intruder Removal? अपना नाम कट गया तो वोट भी कटेगा!”
“कल रोहिंग्या प्रेमी कह रहे थे, आज खुद नोटिस देखकर रो रहे हैं!”
वहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने तो सुप्रीम कोर्ट में धरना दे दिया है। उन्होंने खुद कोर्ट में जाकर कहा—”ये SIR नहीं, बैकडोर NRC है! बंगाल को टारगेट किया जा रहा है। असम में क्यों नहीं? लाखों जिंदा लोगों को मरा हुआ लिख दिया गया!” चुनाव आयोग ने पलटवार किया—”बंगाल में हमारे अफसरों पर हमले हो रहे हैं, systematic violence! BLOs को धमकियां मिल रही हैं!” ममता नहीं मानीं—कह रही हैं, “डेमोक्रेसी बचाओ, वोटर बचाओ!” बंगाल में भी 58 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट में डिलीट हो गए, और मामला अब SC में गर्म है। यहां तक कि ECI अधिकारियों को WhatsApp पर निर्देश मिल रहे हैं—और नियम बदल रहे हैं! क्या ये “WhatsApp Commission” बन गया है?
व्यंग्य की बात ये कि जो राज्य पहले SIR का समर्थन कर रहे थे (घुसपैठियों को हटाने के नाम पर), अब खुद उसी आग में झुलस रहे हैं। बिहार में जब लाखों नाम कटे तो जनता ने ताली बजाई—”अच्छा हुआ!” लेकिन अब छत्तीसगढ़-एमपी में नाम कटते देख लोग चिल्ला रहे हैं—”अरे भाई, हम तो असली भारतीय हैं, फर्जी कैसे हो गए?” और सरकारी अमला? ऊपर वाले टार्गेट देते हैं, नीचे वाले पसीना बहाते हैं, काम रुकता है, और जनता सोचती है—”ये सरकार को क्या हो गया? पढ़ी-लिखी तो लगती नहीं!”
अब तेरा क्या होगा कालिया??
कल तक आसमान में थूक रहे थे—”घुसपैठिए बाहर!” आज थूक नीचे आकर मुंह पर लग गया। खुद को घुसपैठिए जैसा फील हो रहा है, नोटिस देखकर नींद उड़ गई, दस्तावेज खंगालते-खंगालते थक गए। लोकतंत्र की सफाई अच्छी बात है, लेकिन जब सफाई करने वाला खुद गंदा हो जाए तो मजा आ जाता है!

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Author: dhaaranews

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