रायपुर/जशपुर।“नेशनल पंचायत अवॉर्ड-2025” के लिए जारी सरकारी सूची पर अब सवाल उठने लगे हैं। धारा न्यूज डिजिटल ने जब सूची की पड़ताल की, तो सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि चयनित प्रतिनिधियों और अधिकारियों में बड़ी संख्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर से जुड़ी हुई है।
हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर अब तक न सरकार की कोई सफाई सामने आई है, न विपक्ष ने खुलकर सवाल उठाए हैं और न ही किसी बड़े राजनीतिक दल ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है।
धारा न्यूज डिजिटल की जांच में सामने आया कि सूची में जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर सीईओ, उप संचालक, जनपद प्रतिनिधि, सरपंच और सचिव तक—कई नाम जशपुर जिले से जुड़े हैं। जबकि छत्तीसगढ़ में कुल 33 जिले हैं।

अब बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बाकी 32 जिलों में पंचायतों ने ऐसा कोई काम नहीं किया, जो राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सके?
सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि जशपुर जिले में 444 ग्राम पंचायतें हैं और पंचायत ढांचा काफी बड़ा है।
लेकिन सूची में जिस तरह एक ही जिले की मजबूत मौजूदगी दिखाई दे रही है, उसने “चयन प्रक्रिया” को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है।
धारा न्यूज डिजिटल ने इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सार्वजनिक बयान खोजने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक विरोध या खुली टिप्पणी सामने नहीं आई। यही चुप्पी अब नए सवाल पैदा कर रही है।
सोशल मीडिया पर हालांकि लोग लगातार तंज कस रहे हैं—
“क्या यह नेशनल पंचायत अवॉर्ड है या जशपुर पंचायत स्पेशल मिशन?”
कुछ लोग इसे “जशपुर मॉडल” बता रहे हैं, तो कुछ इसे सत्ता और सिस्टम के समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि सरकारी आदेश में चयन को पात्रता और उपलब्धियों के आधार पर बताया गया है, लेकिन धारा न्यूज डिजिटल की पड़ताल में यह जरूर साफ दिखा कि सूची में जशपुर का दबदबा बाकी जिलों की तुलना में कहीं ज्यादा नजर आ रहा है।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस पर कोई स्पष्टीकरण देती है या यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया बहस बनकर रह जाएगा।








