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दो टूक: दो माह पहले वायरल वीडियो पर सीईओ निलंबित, अब सांसद से कथित अभद्रता के आरोपों पर IAS पर कार्रवाई का इंतजार! सत्ताधारी दल के लिए सुशासन के अलग-अलग रूप? पढ़े ये खबर

 

दुर्ग/रायपुर। प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के पैमानों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। करीब दो माह पहले जनपद पंचायत दुर्ग के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूपेश पांडे का एक वीडियो वायरल होने के बाद शासन ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया था। उस मामले में जिस व्यक्ति से कथित अभद्रता की बात सामने आई थी, वह किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के बजाय एक राजनीतिक दल का कार्यकर्ता बताया गया था।

अब एक नया मामला चर्चा में है। वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आईएएस अधिकारी अमित कटारिया पर कथित अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। मामला सार्वजनिक होने के बाद भी अब तक किसी त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। शायद सांसद बृजमोहन जी के लिए यही सुशासन हो

यहीं से सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि दो माह पहले एक वायरल वीडियो के आधार पर तत्कालीन जनपद सीईओ रूपेश पांडे के खिलाफ तत्काल आनन-फानन में शनिवार को दफ्तर खोलकर बिना कोई सवाल जवाब के 4 घंटे में निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती थी, तो अब एक निर्वाचित सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों के मामले में वही तत्परता क्यों दिखाई नहीं दे रही है?

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि क्या कार्रवाई का पैमाना अधिकारी के पद और सेवा वर्ग के अनुसार बदल जाता है? एक ओर जनपद स्तर के अधिकारी पर तत्काल कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर कलेक्टर रैंक के आईएएस अधिकारी से जुड़े मामले में निर्णय का इंतजार लंबा होता दिखाई दे रहा है।

इस घटनाक्रम ने अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के संबंधों पर भी नई बहस छेड़ दी है। चर्चा इस बात की है कि पहले मामले में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद तत्काल कार्रवाई हुई, जबकि अब एक निर्वाचित सांसद द्वारा कथित अभद्रता का आरोप लगाए जाने के बावजूद सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि दोनों मामलों के तथ्य, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही होगा। लेकिन सार्वजनिक विमर्श में उठ रहा मुख्य प्रश्न यही है कि क्या शासन सभी अधिकारियों के मामलों में समान और पारदर्शी मापदंड अपनाता है, या कार्रवाई की गति और स्वरूप पद के अनुसार बदल जाता है?

यही सवाल अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Author: Dhaara News

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