अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षक रोमलाल चन्द्राकर ने प्रस्तुत किया शोधपत्र
बहुभाषी कक्षा-कक्ष के प्रभावी प्रबंधन पर किया शोध, अंग्रेजी शिक्षण को बेहतर बनाने के दिए सुझाव
राजनांदगांव। जिले के छुरिया विकासखंड अंतर्गत शासकीय माध्यमिक शाला गोड़लवाही के शिक्षक रोमलाल चन्द्राकर ने पुणे में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन में अपना शोधपत्र प्रस्तुत कर जिले को गौरवान्वित किया। उन्होंने ‘बहुभाषी कक्षा-कक्ष का प्रभावी व्यवस्थापन’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि विभिन्न भाषाएं बोलने वाले विद्यार्थियों के बीच कक्षा का बेहतर प्रबंधन किस प्रकार किया जा सकता है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा के शिक्षण को अधिक प्रभावी, सरल और विद्यार्थियों के लिए सहज बनाने पर विशेष जोर दिया।

पुणे स्थित एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय में इंग्लिश लैंग्वेज टीचर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (भारतीय अंग्रेजी भाषा शिक्षक संघ) के वार्षिक सम्मेलन के अंतर्गत 10 अक्टूबर तक अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी भाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, भाषा विशेषज्ञों और वक्ताओं ने भाग लिया। इसी क्रम में शिक्षक रोमलाल चन्द्राकर ने राजनांदगांव छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष धनेशराम सिन्हा के नेतृत्व में सहभागिता करते हुए अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया।
सम्मेलन का मुख्य विषय ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में अंग्रेजी : टिके रहना, विकसित होना और उत्कृष्टता प्राप्त करना’ रहा। सम्मेलन में बदलते शैक्षणिक परिवेश, शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उचित उपयोग, उससे जुड़ी चुनौतियों तथा शिक्षण के क्षेत्र में उभरती नई संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। समूह चर्चाओं और शोधपत्र प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
भाषाई विविधता को बनाया जा सकता है शिक्षण का आधार
अपने शोधपत्र में शिक्षक रोमलाल चन्द्राकर ने बताया कि बहुभाषी कक्षा-कक्ष वह होता है, जहां अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि के विद्यार्थी एक साथ अध्ययन करते हैं। ऐसे विद्यार्थी अपनी मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा, राष्ट्रभाषा तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का अलग-अलग स्तर पर ज्ञान रखते हैं। ऐसी परिस्थितियों में विद्यार्थियों की भाषाई विविधता को कठिनाई मानने के बजाय शिक्षण का महत्वपूर्ण संसाधन बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक अपनी शिक्षण पद्धति में विद्यार्थियों की मातृभाषा और भाषाई अनुभवों को स्थान देकर उन्हें अंग्रेजी सीखने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बिना किसी संकोच के अपने विचार व्यक्त कर सकेंगे। साथ ही, सभी विद्यार्थियों को सीखने के समान अवसर मिलेंगे तथा उनके शैक्षणिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बहुभाषी कक्षाओं में प्रभावी संवाद, आपसी सहयोग और सहभागिता को प्रोत्साहित करने वाली शिक्षण व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई। उनका शोध इस बात को रेखांकित करता है कि प्रत्येक विद्यार्थी की भाषाई पृष्ठभूमि का सम्मान करते हुए अंग्रेजी शिक्षण को अधिक सरल, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।
प्रमाणपत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर किया सम्मानित
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुत करने पर शिक्षक रोमलाल चन्द्राकर को प्रमाणपत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। अंग्रेजी भाषा शिक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और शोधपरक प्रयासों की सम्मेलन के अध्यक्ष ने भी सराहना की।
उनकी इस उपलब्धि पर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गोड़लवाही के प्रधान पाठक श्री एस.के. आर्य, प्राचार्य श्री एस.के. पिस्दा तथा विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त किया। जिला पंचायत सदस्य श्री गोपाल भुआर्य, जनपद सदस्य एवं सभापति श्रीमती जैमुन बाई कंवर, सरपंच श्री जगदीश बघेल सहित विजय साहू, भवभूति कलिहारी, भूपेन्द्र नायक, कपिल बघेल तथा ग्राम के गणमान्य नागरिकों ने भी उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
शिक्षक रोमलाल चन्द्राकर की यह उपलब्धि क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उनके शोध प्रयासों से बहुभाषी कक्षाओं में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में नई प्रेरणा मिलेगी।








