RIPA और गौठान योजना में महिला समितियों के उत्थान के दावों की भी होगी समीक्षा, सूत्रों के मुताबिक जल्द शुरू हो सकती है जांच-पड़ताल
जिले में कांग्रेस शासनकाल के दौरान संचालित गौठान और रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (RIPA) से जुड़ी गतिविधियां एक बार फिर जांच के दायरे में आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, जिले के एक गौठान में संचालित गतिविधियों, वहां उपयोग की गई सामग्री और एक बड़ी दूध कंपनी से जुड़े उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर जल्द ही जांच-पड़ताल शुरू हो सकती है।
बताया जा रहा है कि संबंधित अवधि में एक बड़ी दूध कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत बताए जाने वाले व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, दूध एवं दूध से बने उत्पादों के स्टॉक और उनके उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल किए जाने की संभावना है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि गौठान परिसर में कंपनी के उत्पादों से संबंधित गतिविधियां किस स्तर तक संचालित हुईं।
दूसरे नाम से उत्पाद पैकिंग की भी होगी पड़ताल_
सूत्रों की मानें तो पास के एक अन्य गौठान में मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की पैकिंग किए जाने की गतिविधियों की भी जानकारी सामने आई है। ऐसे में जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि इन उत्पादों का निर्माण और पैकिंग किसके नाम से, किन संसाधनों से और किस अनुमति के तहत की जा रही थी।
गौठान योजना के अंतर्गत महिला समितियों और स्व-सहायता समूहों के आर्थिक उत्थान को लेकर किए गए दावों की वास्तविकता की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है। संबंधित समितियों को उपलब्ध कराए गए संसाधनों, उत्पादन, बिक्री और आय-व्यय का रिकॉर्ड भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
गोधाम में तब्दील होने के बाद मशीनें कहां गईं_
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी बताया जा रहा है कि संबंधित गौठान को बाद में गोधाम में तब्दील कर दिया गया। इसके साथ ही वहां पहले उपलब्ध कराई गई मशीनरी और अन्य सामग्री के वर्तमान ठिकाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच शुरू होती है तो मशीनों और उपकरणों की खरीदी से लेकर उनके वितरण, स्थापना, उपयोग और वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जा सकता है। स्टॉक रजिस्टर और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किए जाने पर वास्तविक स्थिति सामने आने की संभावना है।
_संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी हो सकती है जांच के दायरे में_
सूत्र बताते हैं कि जिस अवधि में उक्त गतिविधियां संचालित हुईं, उस समय संबंधित व्यक्ति की पत्नी जनपद पंचायत में महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ थीं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर उनकी भूमिका, संबंधित फाइलों और अनुमतियों की भी जांच-पड़ताल किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि फिलहाल किसी व्यक्ति पर कोई आरोप नहीं है और न ही किसी की भूमिका को दोषी माना जा सकता है। जांच होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि नियमों के अनुसार गतिविधियां संचालित हुई थीं अथवा नहीं।
EOW तक पहुंच सकता है मामला?_
जानकारों के मुताबिक, यदि प्रारंभिक जांच में सरकारी धन, मशीनरी, निजी कंपनी के उत्पादों अथवा आर्थिक लेन-देन से संबंधित गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो मामला आगे उच्चस्तरीय जांच एजेंसी तक भी पहुंच सकता है। आर्थिक अनियमितता के ठोस तथ्य मिलने की स्थिति में EOW जैसी एजेंसी से जांच की संभावना भी बन सकती है।
फिलहाल सूत्रों के मुताबिक संबंधित गौठान की गतिविधियों, उपलब्ध रिकॉर्ड, मशीनरी और महिला समितियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की तैयारी की चर्चा है। यदि जांच होती है तो गौठान से लेकर गोधाम बनने तक की पूरी कहानी और उस दौरान हुए खर्च व संसाधनों के उपयोग की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
अब देखना यह होगा कि संभावित जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या गौठान योजना के नाम पर किए गए दावों की जमीनी हकीकत सरकारी रिकॉर्ड से मेल खाती है।








