निकुम/अंडा। दुर्ग ग्रामीण विधायक के प्रयास से सीएचसी निकुम क्षेत्र में मरीजों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संजीवनी एक्सप्रेस की सुविधा शुरू की गई है। हालांकि स्टाफ की कमी के चलते आपातकालीन चिकित्सा सेवा को लेकर ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार अंडा उप स्वास्थ्य केंद्र, दुर्ग-अंडा-बालोद जिले की मुख्य सड़क पर स्थित है। यहां संजीवनी एक्सप्रेस की सुविधा सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध रहती है, लेकिन रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक पायलट उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहन सेवा बंद हो जाती है।
इसका सबसे अधिक असर रात के समय होने वाली बीमारी अथवा दुर्घटना की आपात स्थिति में देखने को मिलता है। ऐसे समय मरीजों को दुर्ग, अंजोरा अथवा जिला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए निजी वाहन की व्यवस्था करनी पड़ती है। अंडा से दुर्ग-अंजोरा की दूरी करीब 15 से 20 किलोमीटर है, जबकि निकुम अस्पताल रेफर करने में भी समय लग जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बीते चार महीने से यह व्यवस्था चल रही है। गंभीर हादसे अथवा रेयर कंडीशन के मरीजों को यदि समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया गया तो उनकी जान को खतरा भी हो सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए रात में निजी वाहन की व्यवस्था करना अतिरिक्त परेशानी का कारण बनता है।
जल्द होगी स्टाफ की भर्ती
संजीवनी 108 के जिला स्तर के अधिकारियों के अनुसार पायलट की कमी को दूर करने के लिए जल्द ही स्टाफ की भर्ती की जाएगी। प्रक्रिया फिलहाल चल रही है और भर्ती के बाद सेवा में सुधार होने की उम्मीद है
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अंडा पॉइंट पर 24 घंटे पायलट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि रात के समय भी दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि संजीवनी एक्सप्रेस जैसी आपातकालीन सेवा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब यह सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहे।








