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जेवरा चौकी में दर्ज चोरी के मामले ने पकड़ा राजनीतिक रंग, ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं; पुलिस की कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

 

समोदा में चोरी पर सियासत का तड़का! FIR में दो नाम, गांव में चर्चा—“बाकी कौन हैं?” CCTV खुलवाएगा चोरी का पूरा राज?

समोदा। ग्राम समोदा में किसान एवं ठेकेदारी से जुड़े व्यक्ति के गोदाम में हुई चोरी का मामला अब सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं रह गया है। चोरी की घटना को लेकर गांव में पक्ष-विपक्ष की राजनीति, आरोप-प्रत्यारोप और पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस के समक्ष दर्ज शिकायत के अनुसार 28 सितंबर की रात गोदाम से बड़ी मात्रा में सामान चोरी होने की बात सामने आई है। शिकायत में लोकेश चंद्राकर सहित अन्य लोगों पर चोरी का आरोप लगाया गया है और पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की है।

लेकिन गांव में चल रही चर्चाएं इस पूरे मामले को एक अलग मोड़ देती नजर आ रही हैं। ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या चोरी की पूरी घटना में केवल वही लोग शामिल थे, जिनके नाम FIR में सामने आए हैं? या फिर घटनास्थल पर मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होगी?

CCTV में छिपा है पूरा राज?

शिकायतकर्ता के अनुसार गोदाम की निगरानी के लिए कैमरा लगाया गया था और मोबाइल के माध्यम से उसकी निगरानी की जा रही थी। शिकायत में यह भी बताया गया है कि 28 सितंबर की रात संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने के बाद शिकायतकर्ता अपने भतीजे के साथ मौके पर पहुंचा।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोदाम और उसके आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज पुलिस किस तरह खंगालती है? यदि घटना के समय की पूरी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है तो फुटेज से यह स्पष्ट हो सकता है कि गोदाम में कौन-कौन पहुंचा, कौन सामान लेकर निकला और मौके पर कौन-कौन मौजूद था।

FIR में दो नाम, लेकिन गांव में चर्चा कई नामों की

गांव में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि FIR में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, क्या चोरी की पूरी कहानी उन्हीं दो लोगों तक सीमित है?

ग्रामीणों के एक वर्ग का आरोप है कि गांव की आपसी राजनीति के कारण चोरी की घटना को भी पक्ष और विपक्ष के चश्मे से देखा जा रहा है। चर्चा करने वाले लोग यहां तक सवाल उठा रहे हैं कि यदि घटनास्थल पर अन्य लोग भी मौजूद थे तो उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी अन्य व्यक्ति को चोरी में शामिल बताना फिलहाल जांच के निष्कर्ष के बिना उचित नहीं होगा।

“अपने बचेंगे और विरोधी फंसेंगे?”—चर्चा ने पुलिस के सामने खड़ा किया बड़ा सवाल

गांव में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि यदि चोरी की घटना में कई लोग शामिल थे तो कार्रवाई भी सभी संदिग्धों की भूमिका के आधार पर होनी चाहिए। ग्रामीणों के बीच यह सवाल घूम रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि गांव की राजनीतिक खींचतान में कुछ लोगों पर आरोप केंद्रित हो गए हों?

कुछ ग्रामीणों की चर्चा में तो यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि “क्या प्रार्थी के राजनीतिक रूप से करीबी या चुनावी समर्थक लोगों के नाम सामने नहीं लाए गए?” हालांकि यह महज ग्रामीणों की चर्चा है और इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

जेवरा चौकी की जांच पर टिकी नजरें

मामले में पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही है और खबर लिखे जाने तक कुछ संदिग्धों को जेवरा चौकी में रखे जाने की बात सामने आई है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग, घटनास्थल के साक्ष्य और चोरी गए सामान की बरामदगी के आधार पर आगे की जांच किस दिशा में ले जाती है।

समोदा में पहले से चली आ रही राजनीतिक खींचतान के बीच चोरी की यह घटना गांव की राजनीति में एक और नया अध्याय जोड़ती नजर आ रही है। अगर CCTV फुटेज की निष्पक्ष और पूरी जांच होती है तो घटनास्थल पर मौजूद लोगों की वास्तविक भूमिका सामने आने की उम्मीद है।

सबसे बड़ा सवाल यही—चोरी की जांच होगी या राजनीति की?

अब ग्रामीणों की नजर जेवरा चौकी की कार्रवाई पर है। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि कौन किस पक्ष का है, बल्कि सवाल यह है कि चोरी में वास्तव में कौन शामिल था?

अगर दो लोग दोषी हैं तो कार्रवाई उन्हीं पर हो, और यदि जांच में किसी अन्य की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई हो। लेकिन यदि CCTV और अन्य साक्ष्यों की मौजूदगी के बावजूद जांच केवल नामजद आरोपियों तक सीमित रह गई, तो गांव में उठ रहे सवाल और गहरे होंगे।

समोदा में फिलहाल चर्चा एक ही—
“गोदाम से सामान कितनों ने उड़ाया, CCTV क्या दिखा रहा है और FIR में बाकी नाम आखिर क्यों नहीं हैं?”

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Author: Dhaara News

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