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रिसाली नगर निगम में ठेका श्रमिक रोशन देवांगन की दर्दनाक मौत: अब पुलिस प्रक्रिया पर भी सवाल! हादसे की वज़ह अवैध प्लॉटिंग ?

 

रिसाली (दुर्ग-भिलाई)। 22 साल के ठेका श्रमिक रोशन कुमार देवांगन की मौत के मामले में अब नई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। शनिवार को गणेश नगर में चालू बिजली लाइन पर काम करते हुए करंट लगने से उसकी मौके पर मौत हो गई। लेकिन घटना के बाद पुलिस की गैर-मौजूदगी में ही शव को खंभे से उतारा गया। नेवई थाने में प्राथमिक सूचना (प्रारंभिक रिपोर्ट) दर्ज नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, इसकी बजाय कोतवाली दुर्ग में मर्ग कायम की गई है।

यह खुलासा पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है। क्या पुलिस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ? क्या घटना को दबाने की कोशिश की जा रही है? या फिर स्थानीय थाने को बाईपास कर ऊपरी स्तर पर मामला शिफ्ट किया गया?

घटना की नई डिटेल्स और पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल

पहले की रिपोर्ट्स के मुताबिक रोशन रिसाली नगर निगम के ठेके पर अनस्किल्ड लाइनमैन के तौर पर काम कर रहा था। गणेश नगर में किसी स्थानीय व्यक्ति के गृहप्रवेश के लिए लाइट लगाने का काम था। खंभा भी 2 हफ्ते पहले ही लगाया गया था। लेकिन अब पुलिस हैंडलिंग पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं:

  •  नेवई थाना (जिस क्षेत्र में घटना हुई) में प्राथमिक सूचना क्यों नहीं दर्ज हुई?
  • घटना नेवई थाना क्षेत्र (रिसाली भाटा) के अंतर्गत हुई थी, फिर भी स्थानीय थाने में कोई प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
  • पुलिस की गैर-मौजूदगी में शव को खंभे से उतारा कैसे गया?
  • सूत्र बता रहे हैं कि पुलिस पहुंचने से पहले ही शव नीचे उतार लिया गया। यह मानक प्रक्रिया के खिलाफ है
  •  दुर्घटना स्थल पर शव को बिना पुलिस की मौजूदगी और फोटोग्राफी के छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
  •  कोतवाली दुर्ग में मर्ग क्यों कायम की गई?
  • जानकारी के अनुसार, पूरा मामला अब कोतवाली दुर्ग थाने में शिफ्ट कर दिया गया है।
  • क्या यह सामान्य प्रक्रिया है या कोई विशेष वजह?

निगम की महापौर शशि सिन्हा ने आपात बैठक बुलाई और कहा कि दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। परंतु आयुक्त मोनिका वर्मा ने इसमें कोई रुचि नहीं ली है उनकी भी भूमिका इसमें संदिग्ध बताई जा रही है।

वहीं पुलिस की इस कथित लापरवाही ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

बाकी सवाल पहले की तरह कायम

  • काम किसके आदेश पर? – निगम के ठेके के तहत, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी का नाम अभी तक नहीं आया।
  • पूर्व अनुभव और ट्रेनिंग? – अनस्किल्ड लाइनमैन, बिना ट्रेनिंग।
  • क्षेत्र वैध प्लॉट या अवैध? – गणेश नगर में अवैध प्लाटिंग की शिकायतें, निगम की अनुमति पर सवाल।
  • ESI-PF? – ठेका मजदूर, कोई पुष्टि नहीं।
  • मुआवजा? – जांच के बाद तय, लेकिन परिवार को तुरंत राहत चाहिए।
  • सुरक्षा उपकरण? – बिल्कुल नहीं दिए गए।
  • अवैध प्लाटिंग और भ्रष्टाचार की जड़ें अब भी मजबूत

रिसाली निगम क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का खेल जारी है। सूत्रों का कहना है कि प्रति प्लॉट लाखों रुपये लेकर अधिकारियों ने सुविधाएं (बिजली, पानी, लाइट) दे दीं। क्या रोशन का काम भी किसी ऐसे ही “रजिस्टर्ड-अवैध” प्लॉट पर हो रहा था? क्या निगम की नीति “पैसे दो, प्लॉट वैध कर दो” वाली है?

अब पुलिस की प्रक्रिया में आई इस खामी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। क्या यह महज लापरवाही है या कुछ छिपाने की कोशिश?

निगम, महापौर, पुलिस से अब ये सवाल:

  • नेवई थाने में प्राथमिक सूचना दर्ज क्यों नहीं हुई?
  • बिना पुलिस के शव उतारने की अनुमति किसने दी?
  • कोतवाली दुर्ग में मर्ग कायम करने का क्या कारण?
  • ठेका कंपनी, सुरक्षा लापरवाही और अवैध प्लाटिंग पर कब कार्रवाई?

22 साल का रोशन परिवार की उम्मीद था। एक छोटा-सा काम उसकी जान ले गया। अब सवाल ये है – क्या निगम और पुलिस मिलकर इस हादसे की सच्चाई सामने लाएंगे, या फिर सब कुछ दबा दिया जाएगा?

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Author: Dhaara News

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