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तीन महीने में बदला रुख? निलंबित CEO रूपेश पांडे के समर्थन में किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष की पोस्ट चर्चा में

 

दुर्ग। जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ( निलंबित) रूपेश पांडे के निलंबन के बीच उनके समर्थन में सोशल मीडिया पर सामने आई पोस्ट को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि करीब तीन महीने पहले इसी प्रकरण से जुड़े विवाद के दौरान अंडा-निकुम मंडल के किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष एवं आरटीआई कार्यकर्ता नोवेश्वर कुमार पिपरिया ने सोशल मीडिया पर एक अलग रुख रखते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संयम, शालीनता तथा तथ्यों के आधार पर मामले के निराकरण की बात कही थी।

30 मई को किए गए पोस्ट में उन्होंने जनपद पंचायत के CEO और भाजपा मंडल महामंत्री के बीच हुए विवाद का उल्लेख करते हुए कहा था कि किसी भी शिकायत या आपत्ति का समाधान तथ्यों, अभिलेखों और वैधानिक जांच के माध्यम से होना चाहिए। पोस्ट में यह भी कहा गया था कि यदि निर्माण कार्य में अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो और यदि निर्माण वैधानिक है तो स्थिति स्पष्ट कर जनमानस के भ्रम को दूर किया जाए। साथ ही प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से आपसी सम्मान और संयम के साथ कार्य करने की अपेक्षा जताई गई थी।

अब करीब तीन महीने बाद निलंबित CEO रूपेश पांडे के समर्थन में सामने आई पोस्ट में उनका पक्ष मजबूती से रखा गया है। पोस्ट में रूपेश पांडे को निष्पक्ष प्रशासन की पहचान बताते हुए उनके पुराने कार्यकाल और प्रशासनिक योगदान का उल्लेख किया गया है। साथ ही सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करने और गंभीर आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में निलंबन समाप्त कर उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल करने की मांग की गई है।

इन दोनों सोशल मीडिया पोस्ट को साथ रखकर देखें तो समय के साथ रुख में बदलाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। पहले विवाद के समय जहां निष्पक्ष जांच, तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर निर्णय लेने की बात कही गई थी, वहीं अब निलंबन के बाद अधिकारी के समर्थन और उनके सेवा रिकॉर्ड के आधार पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है।

हालांकि यह संबंधित व्यक्ति का व्यक्तिगत मत हो सकता है और इसे किसी राजनीतिक दबाव या किसी अन्य कारण से जोड़ना बिना प्रमाण के उचित नहीं होगा। लेकिन एक ही विवाद से जुड़े मामले में कुछ महीनों के अंतराल पर सामने आए दो अलग-अलग सोशल मीडिया संदेशों ने निश्चित रूप से चर्चा को जन्म दे दिया है।

अब सवाल यह है कि क्या निलंबन के बाद सामने आया समर्थन केवल अधिकारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष समीक्षा की मांग है, या इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर बदलती परिस्थितियों का असर भी दिखाई दे रहा है?

फिलहाल निलंबित CEO रूपेश पांडे के निलंबन और पूरे विवाद पर मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर में विचार अधीन है अंतिम तथ्य जांच एवं शासन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होंगे। लेकिन तीन महीने के अंतराल में सामने आई दोनों पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय जरूर बन गई हैं।

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Author: Dhaara News

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