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सैकड़ों BJP कार्यकर्ताओं की जान जोखिम में डालकर तिरंगा यात्रा?

 

अंडा-निकुम और उतई मंडल की तस्वीरों ने खड़े किए सवाल, पुलिस पर ‘दोहरे मापदंड’ के आरोप

चौक-चौराहों पर आम वाहन चालकों के घर पहुंच रहा चालान, वहीं तिरंगा यात्रा में बिना हेलमेट दौड़ते वाहनों के बीच पुलिस सुरक्षा देती नजर आई—सोशल मीडिया पर उठ रहा सवाल

दुर्ग / जिले में भाजपा के अंडा-निकुम मंडल और उतई मंडल द्वारा निकाली गई तिरंगा यात्राओं की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। देशभक्ति के संदेश के साथ निकाली गई इन यात्राओं में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए, लेकिन सामने आई तस्वीरों में कई दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट वाहन चलाते नजर आ रहे हैं। महिला और पुरुष, दोनों ही बिना हेलमेट दिखाई दे रहे हैं।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि तिरंगा यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन की मौजूदगी रही और सुरक्षा व्यवस्था भी दिखाई दी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सैकड़ों लोगों की मौजूदगी वाली रैली में यातायात नियमों का पालन नहीं हो रहा था, तब पुलिस ने नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए क्या कार्रवाई की?

आम जनता के घर चालान, रैली में ‘स्पेशल सिक्योरिटी’?

दुर्ग पुलिस द्वारा सड़क पर बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। चौक-चौराहों पर नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के चालान किए जा रहे हैं और कई मामलों में चालान उनके घर तक पहुंच रहा है।

लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल तिरंगा यात्रा की तस्वीरें एक व्यंग्यात्मक सवाल खड़ा कर रही हैं—

आम जनता बिना हेलमेट निकले तो चालान, और तिरंगा लेकर निकले तो सुरक्षा?

लोगों का कहना है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो राजनीतिक या सार्वजनिक आयोजनों में भी हेलमेट और यातायात नियमों का पालन उसी सख्ती से कराया जाना चाहिए।

हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और’?

एक तरफ शासन-प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक करता है। दूसरी तरफ तिरंगा यात्रा जैसे बड़े आयोजनों में यदि बिना हेलमेट बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन सड़क पर दौड़ते नजर आएं और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद रहे, तो व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

तस्वीरों में कुछ वाहनों के नंबर भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यातायात विभाग चाहे तो तस्वीरों और वीडियो के आधार पर संबंधित वाहन चालकों की पहचान कर नियमों के उल्लंघन की जांच कर सकता है।

राष्ट्रवाद के साथ यातायात नियमों का सम्मान भी जरूरी

तिरंगा यात्रा देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा आयोजन है। तिरंगा हाथ में लेकर राष्ट्रभक्ति का संदेश देना निश्चित रूप से सकारात्मक पहल है, लेकिन राष्ट्रध्वज के सम्मान के साथ सड़क पर अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

बिना हेलमेट बाइक चलाने से दुर्घटना की स्थिति में जान का गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में सवाल केवल चालान का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का भी है जो यात्रा में शामिल हुए थे।

अब सवाल दुर्ग पुलिस और यातायात विभाग से है—

क्या अंडा-निकुम और उतई मंडल की तिरंगा यात्रा में बिना हेलमेट नजर आए वाहन चालकों पर भी कार्रवाई होगी?

क्योंकि यदि आम नागरिक के लिए नियम सख्त हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्हीं नियमों को नजरअंदाज किया जाता है, तो सोशल मीडिया पर उठ रहा यह व्यंग्यात्मक सवाल अपनी जगह बना ही लेता है—

“चौक पर आम आदमी का चालान, रैली में कार्यकर्ताओं को सुरक्षा—क्या यही सुशासन है?”

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Author: Dhaara News

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