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BIG news: ₹2.73 करोड़ का पुल, कुछ ही समय में धंसा! 4 साल की देरी के बाद भी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

 

दुर्ग। लगभग ₹2.73 करोड़ की लागत से निर्मित अंडा-उतई मार्ग के जंजगिरी नाला पुल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ₹2,73,40,687 की लागत से बने इस पुल के एप्रोच रोड पर निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद ही धंसाव, गहरे गड्ढे और दरारें दिखाई देने लगी हैं। इससे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सेतु निर्माण संभाग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

सूचना पट्ट के अनुसार इस पुल का निर्माण 10 जनवरी 2022 को प्रारंभ हुआ था और 9 दिसंबर 2022 तक पूरा होना था। लेकिन निर्धारित समयसीमा से लगभग चार वर्ष की देरी के बाद पुल तैयार हुआ। अब पुल के एप्रोच मार्ग की खराब स्थिति देखकर क्षेत्रवासी पूछ रहे हैं कि जब पौने तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए, तो गुणवत्ता इतनी खराब क्यों है?

तस्वीरों में पुल के दोनों ओर सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, धंसे हुए हिस्से और उखड़ी हुई डामर की परत स्पष्ट दिखाई दे रही है। बारिश के मौसम में यह स्थिति दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।

इस पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सेतु निर्माण संभाग द्वारा कराया गया है, जबकि निर्माण एजेंसी मेसर्स शिवानी कंस्ट्रक्शन, तेलीबांधा, रायपुर है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जंजगिरी नाला पुल का निर्माण शुरू से ही विवादों में रहा। वर्षों तक निर्माण कार्य लटका रहा और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। क्षेत्र के जानकारों का यह भी दावा है कि पुल निर्माण में हुई देरी और जनता की नाराजगी चुनाव में भी बड़ा मुद्दा बनी थी तथा तत्कालीन मंत्री को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि ₹2.73 करोड़ की लागत वाले इस पुल की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो तथा यदि कहीं लापरवाही या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ₹2.73 करोड़ खर्च होने के बाद भी जनता को ऐसी जर्जर सड़क और धंसा हुआ पुल मिलना चाहिए?

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Author: Dhaara News

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