अंडा/चिंगरी। ग्राम चिंगरी के किसान बीरेन्द्र देशमुख (60 वर्ष) की करंट लगने से हुई मौत के मामले में देर रात आखिरकार प्रशासन, बिजली विभाग और ग्रामीणों के बीच सहमति बन गई। करीब छह घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद बिजली विभाग ने मृतक परिवार को आर्थिक सहायता, रोजगार और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।
धरने के दौरान ग्रामीण लगातार बिजली विभाग की लापरवाही को हादसे का कारण बताते रहे। लंबे मंथन और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद विभाग ने मृतक के दोनों पुत्रों को आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। इसके अलावा तत्काल ₹1.50 लाख अंतिम संस्कार सहायता राशि देने तथा विभागीय क्षतिपूर्ति मद से ₹4 लाख अतिरिक्त मुआवजा प्रदान करने का आश्वासन दिया गया।
बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने घटना को गंभीर मानते हुए मामले की जांच कराने और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके विरुद्ध कार्रवाई करने का भरोसा भी दिया। ग्रामीणों ने इसे विभाग द्वारा अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
समझौता वार्ता के दौरान तहसीलदार वासु मित्र दीवान, एसडीओपी पाटन अनूप लकड़ा, सहायक अभियंता (AE) श्रीकांत परगनिहा, अविनाश दुबे सहित जिले के कई विद्युत अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने परिजनों को लिखित आश्वासन सौंपा, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी।
धरना समाप्त होने के बाद पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने के लिए जिला पंचायत प्रतिनिधि एवं कांग्रेस नेता विक्की मिश्रा ने तत्काल फ्रीजर की व्यवस्था कराई। आंदोलन के दौरान उन्होंने लगातार मध्यस्थता और समन्वय की भूमिका निभाई। वहीं ग्रामीणों की ओर से भाजयुमो अध्यक्ष लक्ष्मण यादव ने आंदोलन की अगुवाई करते हुए ग्रामीणों की मांगों को अधिकारियों के समक्ष मजबूती से रखा।
उल्लेखनीय है कि किसान की मौत के बाद ग्रामीणों ने शव को बिजली कार्यालय के सामने रखकर प्रदर्शन शुरू किया था और विभाग पर वर्षों से की जा रही शिकायतों की अनदेखी का आरोप लगाया था। देर रात लिखित आश्वासन मिलने के बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
प्रमुख निर्णय
मृतक के दोनों पुत्रों को आउटसोर्स के माध्यम से रोजगार।
₹1.50 लाख अंतिम संस्कार सहायता राशि।
₹4 लाख विभागीय क्षतिपूर्ति राशि।
घटना की जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन।
लिखित सहमति के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया।








