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दुर्ग में अवैध जैव उर्वरक-कीटनाशक कारोबार का भंडाफोड़, रीवा निवासी के खिलाफ FIR दर्ज

 

दुर्ग, 23 जुलाई। दुर्ग जिले के ग्राम चिंगरी (अंडा) में अवैध रूप से जैव उत्प्रेरक (बायो-स्टिमुलेंट), उर्वरक एवं कीटनाशकों के निर्माण, भंडारण और विक्रय के मामले में पुलिस ने श्री वरुण त्रिपाठी, निवासी ग्राम एवं पोस्ट अन्तरेला, तहसील जवा, जिला रीवा (मध्यप्रदेश) के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 एवं 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।

अनुविभागीय कृषि अधिकारी, दुर्ग द्वारा थाना अंडा में प्रस्तुत आवेदन के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को अवैध रूप से जैव उत्प्रेरक के विक्रय की सूचना मिलने पर कृषि विभाग की टीम ने ग्राम चिंगरी स्थित चन्द्राकर किराना स्टोर्स के परिसर में बने गोदाम का निरीक्षण किया। गोदाम बंद मिला और मकान मालिक ने बताया कि परिसर किराए पर वरुण त्रिपाठी को दिया गया है।

 

निरीक्षण दल ने वरुण त्रिपाठी से मोबाइल पर संपर्क कर निरीक्षण में उपस्थित होने के लिए कहा, लेकिन उनके द्वारा रायपुर में होने की बात कहकर सहयोग नहीं किया गया। इसके बाद मकान मालिक, ग्राम पंचायत के पंचों एवं किसानों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार कर गोदाम का ताला खुलवाया गया।

निरीक्षण के दौरान गोदाम से बड़ी मात्रा में जैव उत्प्रेरक एवं कीटनाशक निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल तथा तैयार उत्पाद बरामद हुए। जांच में बिना वैध अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) के निर्माण, भंडारण और विक्रय किए जाने, कैश/क्रेडिट मेमो जारी नहीं करने, स्टॉक पंजी का संधारण नहीं करने, निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने तथा निरीक्षण में सहयोग नहीं करने जैसी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

कृषि विभाग ने उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा कीटनाशक अधिनियम, 1968 एवं नियम 1971 के तहत सामग्री जब्त कर वैधानिक कार्रवाई की। इसके बाद थाना अंडा में शिकायत प्रस्तुत की गई, जिसके आधार पर पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 एवं 7 के अंतर्गत अपराध दर्ज कर मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी है।

पुलिस अब जब्त सामग्री, उसके स्रोत, निर्माण और वितरण नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि अवैध रूप से तैयार किए गए जैव उत्पाद और कीटनाशक किन-किन क्षेत्रों में बेचे गए तथा इस कारोबार में अन्य लोगों की संलिप्तता तो नहीं है।

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Author: Dhaara News

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