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RTI मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जुर्माना लगाने से पहले अलग नोटिस जरूरी

RTI Act के तहत लोक सूचना अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले राज्य सूचना आयोग के लिए अधिनियम की धारा 20(1) के तहत अलग से कारण बताओ नोटिस जारी करना और संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देना अनिवार्य है। केवल दूसरी अपील की सुनवाई के दौरान जारी नोटिस के आधार पर सीधे जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।

यह फैसला जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जिसमें एक लोक सूचना अधिकारी ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के आदेश को चुनौती दी थी। आयोग ने अधिकारी पर धारा 20(1) के तहत जुर्माना लगाया था और धारा 20(2) के तहत विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश की थी।

सूचना मांगने से शुरू हुआ था विवाद

मामला कौशल विकास योजना के अंतर्गत खरीदी गई अनुपयोगी सामग्री की नीलामी और निस्तारण से जुड़ी जानकारी से संबंधित था। लोक सूचना अधिकारी ने जवाब में कहा था कि मांगी गई जानकारी अत्यधिक विस्तृत और स्पष्ट नहीं है। इसके बाद प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने 15 दिनों के भीतर निशुल्क सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। हालांकि, सूचना न मिलने का आरोप लगाते हुए आवेदक ने राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील दायर कर दी, जिसके बाद आयोग ने अधिकारी पर जुर्माना लगा दिया।

हाईकोर्ट ने प्रक्रिया का पालन जरूरी बताया

याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि RTI Act की धारा 20(1) के तहत अलग से कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। आयोग ने दूसरी अपील की सुनवाई के दौरान जारी नोटिस को ही अंतिम नोटिस मान लिया, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता। दूसरी ओर, राज्य सूचना आयोग ने तर्क दिया कि अपील की कार्यवाही के दौरान नोटिस दिए जाने के कारण अलग नोटिस की आवश्यकता नहीं थी।

हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि किसी कानून में कार्रवाई की एक निश्चित प्रक्रिया तय की गई है, तो उसका पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है। इसलिए अपील की सुनवाई का नोटिस और जुर्माना लगाने से पहले धारा 20(1) के तहत जारी होने वाला नोटिस अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं और इन्हें एक जैसा नहीं माना जा सकता।

जुर्माने का आदेश किया रद्द

इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने RTI Act से जुड़े इस मामले में याचिका स्वीकार करते हुए 6 सितंबर 2022 को छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी कार्रवाई करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य होगा।

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Author: Dhaara News

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