*विधायक ललित चंद्राकर पर किसानों को गुमराह करने का आरोप, धान की फसल को बीमा कवरेज में शामिल करने की मांग*
दुर्ग। किसान नेता एवं जनपद सदस्य ढालेश साहू ने चक्रवात अर्नब से प्रभावित किसानों की समस्याओं को लेकर विधायक ललित चंद्राकर पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित किसानों को राहत और मुआवजे के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि खेतों में धान की फसल गिरने और जलप्लावन से हुए नुकसान को लेकर किसान परेशान हैं।
ढालेश साहू ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आधिकारिक पुस्तिका का हवाला देते हुए बताया कि स्थानीय आपदाओं के प्रावधान में जलप्लावन से होने वाली क्षति को लेकर धान की सिंचित एवं असिंचित दोनों फसलों को संबंधित बीमा घटक से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि बीमा पुस्तिका की यह शर्त दुर्ग जिले के हजारों धान किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, तो धान की फसल को जलप्लावन से होने वाले नुकसान के लिए बीमा सुरक्षा से बाहर क्यों रखा गया है? सोयाबीन जैसी फसलों में पानी भरने से नुकसान को आपदा के रूप में देखा जाता है, लेकिन धान की फसल के मामले में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है? किसानों को बीमा क्लेम मिलने की उम्मीद है, लेकिन नियमों के कारण उनके सामने परेशानी खड़ी हो रही है।

*प्रभावित किसानों के बीच नहीं पहुंचने पर विधायक को घेरा*
ढालेश साहू ने विधायक ललित चंद्राकर पर आरोप लगाते हुए कहा कि दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। चक्रवात से फसलों को नुकसान पहुंचा है और किसान मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। इसके बावजूद विधायक प्रभावित किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं जानने और समाधान की पहल करने तक नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में किसानों को जनप्रतिनिधियों से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस पहल की अपेक्षा है।
*शासन-प्रशासन के सामने रखीं प्रमुख मांगें*
किसान नेता ढालेश साहू ने शासन एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि अर्नब चक्रवात से हुए जलप्लावन को विशेष आपदा मानते हुए धान की सिंचित एवं असिंचित दोनों फसलों को बीमा कवरेज में शामिल किया जाए। साथ ही जिला प्रशासन लिखित रूप में स्पष्ट करे कि जलप्लावन से प्रभावित धान की फसल का सर्वे किस घटक के अंतर्गत किया जाएगा।
अंत में साहू ने कहा कि विधायक को प्रभावित किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पहल करनी चाहिए। किसानों को उचित मुआवजा और बीमा क्लेम दिलाने के लिए शासन-प्रशासन के स्तर पर ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करना उनके साथ अन्याय होगा।








