Dhaara News

रिव्यू: निकुम में पटपर झांकी मंडली का कार्यक्रम—भक्ति, भीड़ और अव्यवस्थाओं के बीच घिरा आयोजन

 

निकुम। ग्राम निकुम में गुरुवार रात आयोजित ख्याति प्राप्त पटपर झांकी मंडली की प्रस्तुति भारी भीड़ के बीच संपन्न हुई। कार्यक्रम में दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, लेकिन व्यवस्थाओं की कमी और बार-बार उत्पन्न हुए विवादों ने पूरे आयोजन पर सवाल खड़े कर दिए।

कार्यक्रम स्थल पर दर्शकों की संख्या अपेक्षा से अधिक होने के कारण बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। कई लोगों को खड़े होकर कार्यक्रम देखना पड़ा, जबकि सैकड़ों लोग जर्जर भवनों और अन्य असुरक्षित स्थानों पर बैठकर या खड़े होकर प्रस्तुति देखते रहे। जगह नहीं मिलने पर कुछ लोग पेड़ों पर चढ़ गए और जोखिम उठाकर कार्यक्रम का आनंद लेने का प्रयास करते दिखाई दिए।

कार्यक्रम के दौरान देवी-देवताओं से जुड़े जस गीतों की प्रस्तुति पर कई श्रद्धालुओं में धार्मिक भावावेश की स्थिति निर्मित हुई। स्थानीय भाषा में जिसे “देवी आना” या “झूपना” कहा जाता है, ऐसी घटनाएं भी देखने को मिलीं। इसके चलते भीड़ का नियंत्रण और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया तथा माहौल कई बार अस्त-व्यस्त नजर आया।

व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को रातभर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ मौकों पर पुलिस और उपस्थित लोगों के बीच कहासुनी तथा झड़प जैसी स्थिति भी बनी। वहीं प्रकाश व्यवस्था को लेकर लाइट संचालक और कुछ लोगों के बीच विवाद हुआ, जिसके कारण कार्यक्रम को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।

भीड़भाड़ के दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। बताया जाता है कि उनका चेहरा लहूलुहान हो गया था। अत्यधिक भीड़ के कारण पुलिस तत्काल उनके पास तक नहीं पहुंच सकी। कार्यक्रम के दौरान बहस, विवाद और धक्का-मुक्की जैसी घटनाएं भी होती रहीं।

मनोरंजन से ज्यादा आस्था का आकर्षण

कार्यक्रम देखने पहुंचे कई लोगों का मानना था कि दर्शकों की बड़ी संख्या केवल सांस्कृतिक मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि देवी-देवताओं से जुड़े जस गीतों और धार्मिक आस्था के कारण पहुंची थी। प्रस्तुति के दौरान बार-बार धार्मिक भावावेश की घटनाएं इसका संकेत देती हैं।

व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में ऐसे बड़े कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त बैठक व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन, पुलिस बल, बैरिकेडिंग और चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता है। यदि किसी प्रकार की बड़ी दुर्घटना हो जाती तो जवाबदेही तय करना कठिन हो सकता था।

निष्कर्ष

निकुम में आयोजित यह कार्यक्रम अपनी प्रस्तुति से अधिक अव्यवस्था, भीड़ प्रबंधन की कमी और विवादों के कारण चर्चा में रहा। कई दर्शकों ने इसे “पैसा वसूल” कार्यक्रम मानने से इनकार करते हुए कहा कि आयोजन में मनोरंजन की तुलना में अव्यवस्था और जोखिम अधिक दिखाई दिया। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम ग्रामीणों और आयोजन समिति के लिए कई सीख छोड़ गया कि भविष्य में भीड़भाड़ वाले आयोजनों के लिए बेहतर तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है।

Dhaara News
Author: Dhaara News

Leave a Comment