दुर्ग/रिसाली। कृष्णा टॉकीज रोड स्थित कृष्णा मार्ग का प्रमुख नाला इन दिनों अतिक्रमण और कचरा फेंकने की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। यह नाला रिसाली सेक्टर, मरोदा सेक्टर, इस्पात नगर, वीआईपी नगर, आशीष नगर, पूर्व मैत्री नगर, मैत्री नगर, रिसाली बस्ती, आजाद मार्केट सहित अनेक कॉलोनियों के निकासी जल का एकमात्र प्रमुख मार्ग है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का कचरा सीधे इसी नाले में फेंक रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कई लोग चलते-चलते या वाहन से गुजरते समय ही प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट नाले में डाल देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि लगातार और भारी बारिश के दौरान नाला जाम हो जाता है तथा आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। कई घरों में नाले का गंदा पानी घुसने से लोगों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए शासन की जनहित शिकायत व्यवस्था “सुशासन” में आवेदन देकर नाले के दोनों किनारों पर लोहे की जाली या तारबंदी करने का सुझाव दिया गया था, ताकि लोग कचरा न फेंक सकें। आरोप है कि शिकायत के बावजूद न तो संबंधित विभाग ने कोई पूछताछ की और न ही समाधान की दिशा में कोई पहल की।
नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया है कि जनप्रतिनिधियों, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और शासन से वेतन-मानदेय प्राप्त करने वाले जिम्मेदार पदाधिकारियों का दायित्व केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी जनहित की समस्याओं का समय पर निराकरण कराना भी है। उनका कहना है कि स्वच्छता, जल निकासी और नागरिक सुविधाएं ही सुशासन की वास्तविक कसौटी हैं।
इस बीच एक और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार नाले के किनारे सड़क पर अतिक्रमण जैसी स्थिति में एक शुष्क (बिना जल सुविधा वाला) यूरिनल बना दिया गया है। नागरिकों का कहना है कि वहां न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही नियमित सफाई की कोई व्यवस्था दिखाई देती है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में यह स्थान दुर्गंध और गंदगी का नया केंद्र बन सकता है।
स्थानीय रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि नाले से अतिक्रमण हटाकर उसकी नियमित सफाई कराई जाए, कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा नाले को जाली से ढंकने जैसी प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए, जिससे हर वर्ष होने वाले जलभराव और गंदगी की समस्या से स्थायी राहत मिल सके। साथ ही, नगर निगम द्वारा निर्मित सार्वजनिक सुविधाओं की उपयोगिता और रखरखाव की भी समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में नई समस्याएं उत्पन्न न हों।








