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गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के हार के 7 बड़े कारण, कैसे बने मंत्री जी खुद वॉक ओवर पढ़े ये खबर

विशेष रिपोर्ट @ दुर्ग ग्रामीण विधानसभा

पूरे प्रदेश में कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया है 70 से 35 सीटों का सफर कांग्रेस ने इस बार तय किया है तो वहीं भाजपा ने 15 सीटों से छलांग लगाकर 54 तक पहुंच कर सबको चौंका दिया है।
सूबे के दूसरे नंबर के मंत्री ताम्रध्वज साहू कभी कोई चुनाव नहीं लड़ने वाले विधानसभा प्रत्याशी ललित चंद्राकर से 16000 से भी ज्यादा मतों से हार गए उनके हार के प्रमुख कारण को जानने की कोशिश धारा न्यूज़ ने की है। वैसे वे 16000 के अंतर से नहीं हारे हैं बल्कि पिछले बार की 27000 को मिला दे तो 43000 वोटो का गड्ढा कांग्रेस के लिए मंत्री जी ने छोड़ दिया है।
यह आरोप लगता है कि उनके बेटों की मनमानी के चलते यह सब हुआ है लेकिन क्या सिर्फ बेटे ही कारण रहे या कुछ और उसको जानने समझने की कोशिश हमने की है।
1. संगठन की बैठक न होकर घर से बैठक संचालित करना
आप माने या ना माने ब्लॉक संगठन के कई नेता मंत्री जी से काफी नाराज चल रहे थे और इसमें गलती मंत्री जी की ही थी उन्होंने शुरुआत से संगठन को फ्री हैंड नहीं छोड़ा बल्कि अपने हिसाब से हैंडल करने की कोशिश की उसमें वर्षों से ब्लॉक अध्यक्ष रहे नंदकुमार सेन को कोई तवज्जो नहीं मिली वे अपनी कार्यकारिणी की बैठक नहीं ले पाते थे अंतिम समय में केश कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। उनके गांव नगपूरा से ही 1000 से भी ज्यादा वोटो से हार मिली है। यह भी इस बात का जीता जागता प्रमाण है। एन चुनाव के वक्त प्रचार करने के बजाय घर में बैठक लेते रहे वे शायद अपने समर्थकों से यह सुनना चाह रहे थे वाक ओवर मिला है।
2.मुझे चुनाव जीतना आता है
यह वाक्य मंत्री ताम्रध्वज के लिए अहंकार का कड़वा वाक्य बन गया वे लगातार बैठकों में इस तरह के शब्दों का उपयोग करते रहे वह लगातार यह कहते थे की चुनाव कैसे जीतना है वह सब मुझ पर छोड़ दो मुझे चुनाव जीतना आता है। इस वाक्य को संगठन के कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपने अस्मिता का प्रश्न बना लिया और जगह-जगह यह कहने लगे “हमारे बिना जीत के दिखाओ।”
इस वाक्य ने संगठन के पुराने अनुभवी लोगों को समर्पित होकर कार्य करने नहीं दिया। 2018 में चुनाव जीते तब कार्यकर्ताओं को ही बिचौलिया साबित कर दिया था उनसे सीधे संपर्क करने वाली बात ने बड़ा गंभीर परिणाम दिया है।
3.दुर्ग ग्रामीण के युवा स्तंभों को हाशिए में धकेलने की कोशिश
पूरे 5 साल युवा कांग्रेस से दूरी बनाकर मंत्री ताम्रध्वज ने अपने क्षेत्र के युवाओं से बेवजह की दुश्मनी की कोशिश की।अंत तक उस खाई को पाटने में असफल रहे। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए युवा जिला अध्यक्ष जयंत देशमुख का बड़े रोल में ना होना मंत्री ताम्रध्वज के लिए भारी पड़ा उनकी लगातार अनदेखी इस 4 सालों में हुई वह इस चुनाव में भी वैशाली नगर का कमान संभाल रहे थे उनकी बाकायदा नियुक्ति हुई थी उन्होंने युवा कांग्रेस का जिला अध्यक्ष का चुनाव अपने दम पर लड़ा और प्रचंड वोटो से जीत हासिल कर ली थी बताया जाता है कि मंत्री ताम्रध्वज ने मंचो पर और उनके खेमे ने खुलकर विरोध किया जिसका परिणाम उनके समर्थकों ने भी शायद इस चुनाव में दे दिया है।हालांकि जयंत देशमुख ने कभी भी मंत्री ताम्रध्वज का विरोध इस चुनाव में नहीं किया लेकिन 4 साल हुए उनके कार्यकर्ताओं की उपेक्षा ने जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 6 में बड़ी हार दिलाई। जबकि कुछ दिन पूर्व ही जिला पंचायत सदस्य के उपचुनाव में कांग्रेस को एक अच्छी जीत हासिल हुई थी उसे सेमीफाइनल बताया गया था लेकिन फाइनल में मंत्री ताम्रध्वज हार गए। मंत्री ताम्रध्वज साहू यदि जयंत देशमुख व अन्य के नेतृत्व में पहला चुनाव लड़े थे और जीते थे तो इस बार आखिर उन्हें क्यों मनाया नहीं गया और अपने काम के लिए कुछ जिम्मेदारी नहीं दी गई। श्रम कल्याण मंडल उपाध्यक्ष केशव बंटी हरमुख के भी कार्यकर्ताओं ने भी 5 साल हुए उपेक्षा को झेला। जिसने मंत्री ताम्रध्वज को 16000 वोटो से हार पर धकेल दिया। उनके तीन समर्थकों का एक विवादित वीडियो वायरल हुआ, तो वही करीबी कहे जाने वाले कामेश साहू ने जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी से चुनाव लड़ा और लगातार उनका खुलकर विरोध किया वहीं पिछले चुनाव में कुथरेल सेक्टर का प्रभार संभालने वाले नारद साहू ने भी निर्दलीय प्रत्याशी बनकर सबको चौंका दिया था।इस तरह की स्थिति को क्यो मंत्री ताम्रध्वज ने उत्पन्न होने दिया।
4.चुनाव प्रचार में CM कुथरेल आए करोड़ों का विकास तब भी हार 
दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में प्रचार करने कम ग्राम कुथरेल पहुंचे थे उन्होंने इस दौरान मंत्री ताम्रध्वज को 54000 वोटो से जीताने की अपील की थी। यहां कुर्मी और तेली समाज का दबदबा है। बताया जाता है कि इन 5 सालों में 15 करोड़ के विकास इस गांव में हुए हैं। वही नंदकुमार सेन के स्थान पर ब्लॉक अध्यक्ष का खिताब भी इसी गांव के प्रदीप चंद्राकर को मिला है जो अपने गांव में 500 से भी ज्यादा वोटो से हरा डाले हैं। यहां भाजपा के मैनेजमेंट ने भी बड़ा काम किया है।
5.भाजपाइयो से असीम प्रेम बना काल
विकास के नाम पर कांग्रेस बीजेपी नहीं होना चाहिए इस तरह की बातें मंत्री जी हर मंच से करते थे लेकिन वह कांग्रेसियों से ज्यादा तवज्जो बीजेपी के कार्यकर्ताओं को देते रहे यह बात कांग्रेसियों को कैसे अच्छी लगती यह बात सही है कि आप सभी के लिए विधायक हो जाते हैं लेकिन पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के बजाय जब दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता को ज्यादा तवज्जो मिले तो पार्टी कार्यकर्ताओं को बहुत पीड़ा होती है कार्यकर्ता क्षेत्र में अपनी पार्टी के लिए एक दूसरे से भिड़ जाते हैं। भाजपा शासन काल के 15 सालों में कांग्रेसियों की इतनी बुरी स्थिति कभी नहीं रही जिस स्थिति का सामना उन्होंने इस चुनाव में किया पुराने जितने कांग्रेसी कार्यकर्ता थे वे पूरे 5 साल उपेक्षित रहे सिर्फ बंगले से जुड़ने वाले लोग जो आगे पीछे घूमते थे उन्हीं की बात सर आंखों पर रखी गई।
6.अधिकारियों की मनमानी एक अधिकारी फोन ना उठाएं
क्षेत्र में सड़के बनी विकास हुआ तो भ्रष्टाचार भी कम नहीं हुआ। पुलिस थाना में किसी कांग्रेसी का काम नहीं होता था सड़क खराब बनती थी तो पीडब्ल्यूडी अधिकारी फोन नहीं उठाते थे। फिर भी उन पर कृपा बनी रही। रिसाली निगम के कमिश्नर के खिलाफ पार्षदों ने खुलकर बोला दबी जुबान से बोले तब भी मंत्री समझ नहीं पाए या कहे अनदेखा करते रहे निगम की सामान्य सभा में सत्ता पक्ष की घनघोर बेईज्जती हुई अफसरशाही पूरे दुर्ग ग्रामीण में हावी रही। अवैध तरीके से खनन का काम हुआ कांग्रेसी कांग्रेसियों का ही कंप्लेंट करते थे कोई सुलह नहीं थी न सुलह करने का प्रयास किया गया एक दूसरे को नीचे दिखाने का प्रयास जारी रहा।
7.खुले हाथों से कभी लोगों का सहयोग नहीं
क्षेत्र की जनता उसके दरबार में जाती थी तो सरकारी नियम कानून के दायरे में बंधे होने का दुहाई मंत्री जी देते थे कई सामाजिक लोग सहित दीन दुखी गरीब तबके के लोग मदद मांगने आते थे उन्हें भी दिल खोलकर सहयोग नहीं किया जाता था बल्कि सरकारी खजाने से कांग्रेसियों को उपकृत करने का असफल प्रयास किया गया।
क्षेत्र में कबड्डी प्रतियोगिता हुई क्रिकेट प्रतियोगिता हुई तो वही तैराकी में ग्राम पूरई में गोल्डन बुक का रिकॉर्ड दो फीमेल तैराकियों ने बनाया पता चला कि उन्हें भी कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिला एक कबड्डी प्रतियोगिता तो इसी सहयोग के चलते एक साल लेट में हुआ जिसके चलते काफी नाराज़गियों का सामना करना पड़ा है।

वैसे हार के बाद कई बातें होती है लेकिन अपने ही बातों में मंत्री जी कायम नही रहे अगर मंत्री जी चाहते तो इन परिस्थितियों पर संज्ञान पहले ही ले सकते थे उनके बेटों पर यह आरोप लग रहा है उनके बेटे फोन नही उठाते इसमें बेटो की गलती कैसे हो गई आपने विधायक सेवक तो मंत्री जी को बनाया था बेटों को आप फोन ही क्यों करते थे किसने कहा फोन करने।
जैसा फसल बोए गए वैसा ही आज काटा गया है। यह अंतिम सत्य है। दूसरी बात भाजपा प्रत्याशी ललित चंद्राकर को वाक ओवर समझा जा रहा था लेकिन आज मंत्री जी ललित चंद्राकर के लिए वॉक ओवर हो गए।

 

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Author: dhaaranews

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