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CG High Court: पुरानी वेटिंग लिस्ट से नौकरी नहीं दे सकते, हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को माना सही, भर्ती प्रक्रिया पर दिया बड़ा फैसला

बिलासपुर। सरकारी नौकरियों में पुरानी प्रतीक्षा सूची के उपयोग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद सृजित नए पदों पर पुरानी चयन या प्रतीक्षा सूची के आधार पर नियुक्तियां देना संविधान के समानता और समान अवसर के सिद्धांतों के विपरीत है।

भृत्य और शिक्षिका की अपील हुई खारिज

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में कार्यरत एक भृत्य और एक शिक्षिका की रिट अपीलों को खारिज करते हुए उनकी सेवा समाप्ति के आदेश को वैध माना। अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय तक सेवा करने या अधिकारियों की गलती के कारण अवैध नियुक्ति को वैध नहीं माना जा सकता।

पुरानी चयन सूची से नियुक्ति पर जताई आपत्ति

मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि वर्ष 2012 की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाद में सृजित कुछ पदों पर पुरानी प्रतीक्षा सूची से नियुक्तियां दी गई थीं। हाईकोर्ट ने इसे भर्ती नियमों के विपरीत बताते हुए कहा कि इससे उन अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, जो बाद के वर्षों में पात्र बने।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर अदालत ने तय किए अहम सिद्धांत

फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियां केवल विज्ञापित पदों तक सीमित रहनी चाहिए। भविष्य में सृजित पदों को पुरानी प्रतीक्षा सूची से भरना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि नियमों के विरुद्ध की गई नियुक्तियों को केवल लंबे समय तक सेवा देने के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता।

भविष्य की भर्तियों के लिए अहम संदेश

हाईकोर्ट के इस फैसले को सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने दोहराया कि पारदर्शी और नियमसम्मत भर्ती ही सभी पात्र अभ्यर्थियों के समान अवसर के संवैधानिक अधिकार की रक्षा कर सकती है।

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Author: Dhaara News

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