चेन्नई। तमिलनाडु में सरकार बने अभी दस दिन भी पूरे नहीं हुए हैं। लेकिन सीएम विजय की कुर्सी हिलने लगी है। सीपीआईएम ने साफ कर दिया है कि अगर टीवीके ने एआईएडीएमके से हाथ मिलाया तो वे अपने समर्थन पर दोबारा विचार करेंगे।
सीपीआईएम ने क्यों दी यह धमकी?
सीपीआईएम के राज्य सचिव पी षणमुगम ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने टीवीके को सिर्फ इसलिए समर्थन दिया था, क्योंकि तमिलनाडु दोबारा चुनाव झेलने को तैयार नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की मंशा थी कि पिछले दरवाजे से राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। वामपंथी दलों ने यह नहीं होने दिया।
जनादेश के खिलाफ होगा AIADMK से गठबंधन
षणमुगम ने साफ कहा कि इस चुनाव में जनादेश डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के खिलाफ था। इसलिए उनसे समर्थन लेकर सरकार चलाना जनता के फैसले के खिलाफ होगा।
उन्होंने कहा, “अगर विजय एआईएडीएमके के किसी ग्रुप या उनके साथ जाकर सरकार चलाते हैं, तो हम अपने फैसले पर दोबारा गौर करेंगे।”
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, टीवीके को 108 सीटें मिली हैं। वह सबसे बड़ी पार्टी तो है, लेकिन बहुमत से दूर है। कांग्रेस, वामपंथी दल, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से ही सरकार बनी है।
अब खबर है कि सीएम विजय अपनी सरकार को मजबूत करने के लिए एआईएडीएमके के 25 बागी विधायकों को साथ लाने पर विचार कर रहे हैं। ये वही विधायक हैं, जिन्होंने हाल में विश्वास मत के दौरान क्रॉस वोटिंग की थी।
क्या होगा अगर समर्थन वापस लिया गया?
अगर सीपीआईएम ने सच में समर्थन वापस ले लिया, तो कांग्रेस के 5 विधायकों को छोड़कर बाकी चार दलों के 8 विधायक सरकार छोड़ सकते हैं। हालांकि, विजय के पास विकल्प भी है।
वह एआईएडीएमके के 25 बागी विधायकों और एएमएमके के एक विधायक का समर्थन लेकर सरकार बचा सकते हैं। लेकिन इससे जनता में गलत संदेश जाएगा। फिलहाल टीवीके की कोर टीम इस उलझन को सुलझाने में जुटी है।







